रामपुर: रामपुर रियासतकाल से ही शिया–सुन्नी इत्तेहाद की मिसाल रहा है। यही भाईचारा सातवीं मोहर्रम की मजलिस के दौरान इमामबाड़ा खासबाग में फिर दिखाई दिया। मजलिस में प्रोफेसर अब्बास रजा नैय्यर जलालपुरी के खिताब से पहले अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर अजहर इनायती ने नातिया कलाम पेश किया और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। अजहर इनायती सुन्नी हैं, और उनकी उपस्थिति ने इस इत्तेहाद को और मजबूत किया।
मजलिस में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां समेत काफी संख्या में सुन्नी मुसलमान भी शामिल हुए। काशिफ खां ने बताया कि रामपुर में 174 सालों के शासन में कई नवाब सुन्नी और कई नवाब शिया रहे हैं। किसी भी शासक ने मसलक के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया, इसलिए दोनों ही मसलकों के लोगों के बीच कभी दूरी पैदा नहीं हुई।
पूर्व सांसद बेगम नूरबानो और पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने मजलिस में कलाम पेश करने के लिए अजहर इनायती का शुक्रिया अदा किया।
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